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बंगाल में भ्रष्टाचार पर बढ़ी कार्रवाई, टीएमसी के दो पार्षद गिरफ्तार, कई गंभीर आरोपों की जांच जारी

पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और कथित अवैध वसूली के मामलों पर कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो पार्षदों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए पार्षदों पर जबरन वसूली, धमकी देने और विभिन्न परियोजनाओं में अनियमितताओं से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इन गिरफ्तारियों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार पार्षदों में Sachin Singh और Arijit Das Thakur शामिल हैं। दोनों को अलग-अलग मामलों में हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि इन नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापारियों, पार्किंग संचालकों और रियल एस्टेट कारोबारियों से अवैध रूप से धन वसूला।

सचिन सिंह की गिरफ्तारी के दौरान उनके आवास के बाहर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच भी मतभेद देखने को मिले। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पार्षद के प्रभाव के कारण इलाके में विरोधियों को धमकाने और मारपीट जैसी घटनाएं होती रही हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सचिन सिंह के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। आरोप है कि उन्होंने पार्किंग संचालन और स्थानीय विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों से कथित रूप से कमीशन और अवैध धन की मांग की। इसके अलावा उन पर धोखाधड़ी और गैरकानूनी तरीके से धन एकत्र करने के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

वहीं दूसरी ओर, अरिजित दास ठाकुर पर स्थानीय दुकानदारों और रियल एस्टेट डेवलपर्स को डराकर धन वसूलने के आरोप लगे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी शिकायतों की विस्तार से पड़ताल की जा रही है।

इन गिरफ्तारियों को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। हाल के सप्ताहों में विभिन्न नगर निकायों से जुड़े कई जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसियां पुराने मामलों और लंबित शिकायतों की भी समीक्षा कर रही हैं।

इसी कड़ी में हाल ही में Tarun Chakraborty नामक एक अन्य पार्षद को भी गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि गरीबों के लिए भेजी गई राहत सामग्री को अपने घर में जमा करके रखा गया था। पुलिस ने उनके घर से बड़ी मात्रा में राहत सामग्री बरामद करने का दावा किया है। इसके अलावा उन पर अवैध रेत कारोबार, जबरन वसूली और सरकारी योजनाओं के नाम पर धन उगाही जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

इससे पहले मई महीने में Sudip Polley को भी कथित रूप से लाखों रुपये की अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के दौरान अदालत परिसर के बाहर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था और उनके खिलाफ नारेबाजी की गई थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन लगातार हो रही गिरफ्तारियों का असर आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है। वहीं पुलिस और जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है तथा किसी भी मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।

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