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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर प्रतिबंध जारी रखने की सिफारिश, सरकारी समिति ने बताई राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंता

अभिनेता और गायक Diljit Dosanjh अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ पर भारत में लगी रोक फिलहाल जारी रह सकती है। केंद्र सरकार द्वारा गठित एक अंतर-विभागीय समिति (Inter-Departmental Committee – IDC) ने फिल्म की विस्तृत समीक्षा के बाद इसकी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर लगे प्रतिबंध को बरकरार रखने की सिफारिश की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, समिति का मानना है कि फिल्म की सामग्री भारत की संप्रभुता और अखंडता से जुड़े मुद्दों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

क्या है पूरा मामला?

निर्देशक Honey Trehan की फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra के जीवन पर आधारित है। जसवंत सिंह खालड़ा ने वर्ष 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के कथित अंतिम संस्कार की जांच की थी। वर्ष 1995 में उनका कथित तौर पर अपहरण कर हत्या कर दी गई थी।

फिल्म 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के दो दिन बाद ही भारत में इसे हटा दिया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए फिल्म की स्ट्रीमिंग पर रोक लगा दी थी।

सरकार ने बनाई थी विशेष समिति

फिल्म को लेकर उठे विवाद के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आईटी नियम, 2021 के तहत एक इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) का गठन किया था। इस समिति में सूचना एवं प्रसारण, गृह, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, महिला एवं बाल विकास, विदेश, रक्षा तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय सहित कई विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे।

समिति का काम फिल्म की सामग्री की समीक्षा कर यह तय करना था कि उस पर लगी रोक जारी रखी जाए या हटाई जाए।

प्रतिबंध को बताया उचित

सरकारी सूत्रों के अनुसार, समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत लगाया गया प्रतिबंध उचित था। समिति का मानना है कि फिल्म की कहानी संतुलित नहीं है और इसमें पंजाब में आतंकवाद के दौर के घटनाक्रम को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि फिल्म में उग्रवादियों की गतिविधियों को अपेक्षाकृत नरम तरीके से दिखाया गया है, जबकि सुरक्षा बलों की कथित ज्यादतियों पर अधिक जोर दिया गया है। समिति के अनुसार, इस प्रकार का चित्रण संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर विवाद और सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है।

क्या कहती है धारा 69A?

आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 69A केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह ऐसे ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक कर सकती है, जो भारत की संप्रभुता, अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या विदेशी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के लिए खतरा माना जाए।

इसके अलावा आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के भाग-III के तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उन सामग्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है, जो Central Board of Film Certification (CBFC) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं।

पंजाब में बना राजनीतिक मुद्दा

फिल्म पर प्रतिबंध का मामला पंजाब में राजनीतिक रंग भी ले चुका है। Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee (SGPC) ने केंद्र सरकार से फिल्म पर लगी रोक हटाने की मांग की है। वहीं **Shiromani Akali Dal> ने राज्यभर में फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने की घोषणा की है।

अंतिम फैसला सरकार के हाथ में

हालांकि समिति ने प्रतिबंध जारी रखने की सिफारिश कर दी है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। यदि सरकार समिति की सिफारिश स्वीकार करती है, तो ‘सतलुज’ भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं होगी। वहीं यदि भविष्य में नए सिरे से समीक्षा होती है, तो इस फैसले में बदलाव भी संभव है।

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