असम में लगातार जारी बाढ़ ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 21 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद इस वर्ष राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, बाढ़ का असर अब 16 जिलों तक पहुंच चुका है और 5.64 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में हैं।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में गांव जलमग्न हो गए हैं और हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
किन जिलों में सबसे अधिक नुकसान?
ASDMA की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक प्रभावित आबादी शिवसागर जिले में है, जहां लगभग 3.59 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा जोरहाट में 87 हजार से अधिक और चराइदेव में 72 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
राज्य के गोलाघाट, कामरूप, होजाई, डिब्रूगढ़, बिश्वनाथ, धेमाजी, सोनितपुर, उदलगुरी, नगांव, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग और लखीमपुर सहित कुल 16 जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
872 गांव अब भी जलमग्न
अधिकारियों के अनुसार, राज्य के 44 राजस्व क्षेत्रों के 872 गांव अब भी पानी में डूबे हुए हैं। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।
बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने 71 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां 12 हजार से अधिक विस्थापित लोग रह रहे हैं। इसके अलावा 202 राहत वितरण केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं।
कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
राज्य की कई प्रमुख नदियां अब भी उफान पर हैं। दिखौ, दिसांग, ब्रह्मपुत्र, बुरहीदिहिंग और धानसिरी (दक्षिण) जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है।
राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। इस अभियान में भारतीय वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) तथा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की टीमें संयुक्त रूप से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री वितरित करने में जुटी हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि वे बुधवार से सबसे अधिक प्रभावित जिलों का दौरा करेंगे और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा और बादल फटने जैसी घटनाओं के कारण राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है।
रेल सेवाएं भी प्रभावित
बाढ़ का असर रेलवे नेटवर्क पर भी पड़ा है। शिवसागर जिले के आसपास रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने से कई रेल मार्गों पर परिचालन रोकना पड़ा है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने कई ट्रेनों को रद्द, मार्ग परिवर्तित या आंशिक रूप से संचालित किया है। यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ विशेष ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं।
मोबाइल नेटवर्क बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए दूरसंचार विभाग ने 24 जुलाई तक इंट्रा-सर्किल रोमिंग (ICR) सुविधा लागू की है। इसके तहत यदि किसी उपभोक्ता का मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होगा, तो वह दूसरे उपलब्ध नेटवर्क के जरिए कॉल और अन्य सेवाओं का उपयोग कर सकेगा।








