Toxic Movie Review: KGF की झलक के बीच Yash की फिल्म क्यों रह जाती है एक बड़ी गैंगस्टर गाथा से पीछे?

Toxic Review: साउथ सुपरस्टार यश करीब चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। उनकी नई फिल्म ‘Toxic: A Fairytale for Grown-ups’ एक बड़े बजट की गैंगस्टर ड्रामा फिल्म है, जिसमें अपराध, परिवार, सत्ता, बदला और पुराने जख्मों की कहानी को एक साथ पिरोने की कोशिश की गई है। फिल्म में यश के साथ नयनतारा और रुक्मिणी वसंत जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं।

यश की पिछली फिल्म ‘KGF: Chapter 2’ साल 2022 में रिलीज हुई थी और रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1,250 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। ‘KGF’ फ्रेंचाइजी की जबरदस्त सफलता के बाद यश की लोकप्रियता सिर्फ कन्नड़ सिनेमा तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह पूरे भारत में अपनी पहचान बनाने वाले बड़े सितारे बन गए। ऐसे में उनकी अगली फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं।

चार साल के अंतराल के बाद यश ने ‘Toxic’ के जरिए वापसी की है। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है और इसे बड़े पैमाने पर बनाया गया गैंगस्टर ड्रामा बताया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म का बजट 500 करोड़ रुपये से अधिक है। इतनी बड़ी लागत, यश की स्टार पावर और ‘KGF’ के बाद उनकी वापसी ने फिल्म को रिलीज से पहले ही खास चर्चा में ला दिया था।

1940 के दशक के गोवा में बुनी गई अपराध की कहानी

‘Toxic’ की कहानी का बड़ा हिस्सा 1940 के दशक के गोवा की पृष्ठभूमि में रखा गया है। उस दौर के अपराध जगत, अवैध कारोबार और प्रभावशाली आपराधिक नेटवर्क को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है।

फिल्म में यश राया नाम के किरदार में नजर आते हैं। राया का चरित्र सामान्य गैंगस्टर जैसा नहीं है। वह अपने अतीत के अनुभवों और संघर्षों से काफी कठोर हो चुका है। उसके फैसलों और व्यवहार पर उसके पुराने जख्मों का असर साफ दिखाई देता है।

राया के साथ उसकी बड़ी बहन गंगा का किरदार भी कहानी में महत्वपूर्ण है, जिसे नयनतारा ने निभाया है। दोनों भाई-बहन एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हैं और अफीम के कारोबार से जुड़े हुए हैं।

इसी नेटवर्क में सल्वाडोर नाम का एक शक्तिशाली व्यक्ति भी है, जिसका अपराध की दुनिया में खास प्रभाव है। सल्वाडोर की मौजूदगी कहानी को और जटिल बनाती है और राया के सामने मौजूद खतरों को भी बढ़ाती है।

राया और मेलिसा के बीच टकराव

फिल्म के शुरुआती हिस्से में मेलिसा, जिसका किरदार रुक्मिणी वसंत ने निभाया है, बदला लेने के इरादे से राया के सामने पहुंचती है। उसके शरीर पर बम बंधा हुआ है और वह राया को धमकी देती है कि वह उसे अपने साथ खत्म कर देगी।

हालात बेहद तनावपूर्ण हैं, लेकिन राया इस खतरे से भी असामान्य रूप से शांत दिखाई देता है। वह मौत का सामना पहले भी कई बार कर चुका है और हर बार उससे बच निकलने का अनुभव उसके व्यक्तित्व को और कठोर बना चुका है।

इस दृश्य में राया का रवैया यह स्पष्ट करता है कि फिल्म का मुख्य किरदार परिस्थितियों से डरने वाला व्यक्ति नहीं है। उसके लिए खतरा और मौत उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, इस दृश्य में इस्तेमाल संवाद और उसका अंदाज फिल्म के वयस्क और डार्क टोन को भी सामने लाते हैं।

राया कोई पारंपरिक गैंगस्टर नहीं

‘Toxic’ की सबसे दिलचस्प बात इसके मुख्य किरदार राया की प्रस्तुति है। वह केवल एक ताकतवर अपराधी नहीं है, बल्कि उसके व्यक्तित्व के पीछे एक जटिल अतीत भी है।

राया के जीवन में परिवार, अपराध और पुराने संघर्षों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उसकी बड़ी बहन गंगा के साथ उसका रिश्ता कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं अपराध की दुनिया में उसकी बढ़ती भूमिका उसे लगातार नए संघर्षों की ओर ले जाती है।

राया आगे चलकर सल्वाडोर की बेटी रेबेका से शादी करता है। यह रिश्ता भी कहानी में केवल व्यक्तिगत संबंध तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अपराध की दुनिया में मौजूद सत्ता और रिश्तों के समीकरण को प्रभावित करता है।

यही वजह है कि फिल्म राया को सिर्फ एक ‘माचो गैंगस्टर’ के रूप में पेश करने के बजाय उसके अतीत और भावनात्मक संघर्षों को भी सामने लाने की कोशिश करती है।

KGF की याद दिलाता है Yash का अंदाज

यश को एक बड़े गैंगस्टर किरदार में देखने के कारण ‘Toxic’ की तुलना स्वाभाविक रूप से ‘KGF’ से होती है। दोनों फिल्मों में यश का किरदार अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाला मजबूत और प्रभावशाली व्यक्ति है।

हालांकि, ‘Toxic’ का वातावरण और कहानी ‘KGF’ से अलग दिशा में जाने की कोशिश करती है। यहां 1940 के दशक का गोवा, अपराध का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, पारिवारिक रिश्ते और किरदारों के व्यक्तिगत संघर्ष कहानी को अलग आधार देते हैं।

फिर भी यश की स्क्रीन प्रेजेंस, उनका कठोर अंदाज और एक्शन से जुड़ा व्यक्तित्व कई जगह दर्शकों को ‘KGF’ की याद दिला सकता है। यही फिल्म की ताकत भी है और चुनौती भी, क्योंकि ‘KGF’ के बाद यश से दर्शकों की अपेक्षाएं काफी बढ़ चुकी हैं।

क्या फिल्म हॉलीवुड स्तर की गैंगस्टर एपिक बन पाती है?

‘Toxic’ को बड़े बजट और भव्य स्तर पर तैयार किया गया है। फिल्म का उद्देश्य एक ऐसी गैंगस्टर कहानी पेश करना है जिसमें अपराध की दुनिया के साथ-साथ परिवार, सत्ता, विश्वासघात और व्यक्तिगत संघर्ष भी शामिल हों।

फिल्म में बड़े पैमाने की दुनिया बनाने की कोशिश स्पष्ट दिखाई देती है। लेकिन केवल बड़ा बजट और भव्य सेटअप किसी फिल्म को अपने आप एक यादगार गैंगस्टर एपिक नहीं बना देते। कहानी की गहराई, किरदारों का विकास और घटनाओं के बीच मजबूत जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

यहीं पर ‘Toxic’ कुछ जगहों पर उस स्तर तक पहुंचने से पीछे रह जाती है, जिसकी उम्मीद यश जैसे बड़े स्टार की फिल्म से की जा सकती है। फिल्म में महत्वाकांक्षा बड़ी है, लेकिन हर स्तर पर उसका प्रभाव उतना मजबूत महसूस नहीं होता।

Yash की वापसी कितनी प्रभावी?

चार साल बाद यश की वापसी निश्चित तौर पर फिल्म की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है। अभिनेता की स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार का रौब फिल्म को शुरुआत से ही एक अलग ऊर्जा देता है।

लेकिन ‘KGF’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि दर्शकों को कुछ नया कैसे दिया जाए। ‘Toxic’ इस दिशा में प्रयास करती है और राया के किरदार को एक अलग पृष्ठभूमि देने की कोशिश करती है।

फिल्म में यश का किरदार केवल बाहरी ताकत पर आधारित नहीं है। उसके अतीत, परिवार और अपराध की दुनिया से जुड़े फैसले उसके व्यक्तित्व को आकार देते हैं। यही पहलू राया को कहानी के दूसरे गैंगस्टर किरदारों से अलग करने की कोशिश करता है।

Nayanthara और Rukmini Vasanth की भूमिकाएं भी अहम

फिल्म में नयनतारा गंगा के किरदार में हैं। राया की बड़ी बहन के रूप में उनका किरदार कहानी के पारिवारिक पक्ष को मजबूत करता है। भाई-बहन का रिश्ता फिल्म की कहानी में एक महत्वपूर्ण भावनात्मक आधार तैयार करता है।

वहीं रुक्मिणी वसंत का मेलिसा वाला किरदार कहानी में तनाव और टकराव पैदा करता है। राया के सामने बदले की भावना के साथ पहुंचने वाला यह किरदार फिल्म की घटनाओं को एक अलग दिशा देता है।

इसके अलावा डैरेल डी’सिल्वा सल्वाडोर के किरदार में अपराध की दुनिया के प्रभावशाली चेहरे के रूप में नजर आते हैं। उनका किरदार राया की कहानी में सत्ता और खतरे की एक और परत जोड़ता है।

कुल मिलाकर कैसी है ‘Toxic’?

‘Toxic: A Fairytale for Grown-ups’ एक महत्वाकांक्षी गैंगस्टर ड्रामा है, जो यश की लोकप्रियता और ‘KGF’ के बाद बनी उनकी छवि का फायदा उठाते हुए एक अलग दौर और अलग अपराध जगत की कहानी पेश करने की कोशिश करती है।

फिल्म की कहानी 1940 के दशक के गोवा में स्थापित है और इसमें अपराध के साथ-साथ पारिवारिक रिश्तों, बदले, सत्ता और अतीत के जख्मों को भी जगह दी गई है। राया का किरदार फिल्म का केंद्र है और यश उसे अपने दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के साथ निभाते हैं।

हालांकि, फिल्म की तुलना जब बड़े पैमाने की हॉलीवुड गैंगस्टर फिल्मों या ‘KGF’ जैसी प्रभावशाली फ्रेंचाइजी से की जाती है, तो इसकी कमियां भी सामने आती हैं। भव्यता और बड़े स्तर के बावजूद कहानी हर जगह उतना मजबूत प्रभाव पैदा नहीं कर पाती, जितनी इससे उम्मीद की जाती है।

फिर भी यश के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म खास है, क्योंकि चार साल बाद उनका बड़े पर्दे पर लौटना अपने आप में एक बड़ा सिनेमाई इवेंट है। ‘Toxic’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि यह यश को एक बार फिर एक बड़े और जटिल गैंगस्टर किरदार में सामने लाती है, जबकि फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती अपनी अलग पहचान बनाना है।

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