भारत में चीनी की कीमतों में नरमी से वैश्विक बाजार पर असर, Raw Sugar Futures में 3% तक गिरावट

Sugar Price News: भारत में घरेलू चीनी की कीमतों में आई नरमी ने वैश्विक बाजार में चीनी की मांग को लेकर अनुमान बदल दिए हैं। इसका असर न्यूयॉर्क और लंदन के शुगर फ्यूचर्स बाजार में भी देखने को मिला, जहां मंगलवार को कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

भारत में घरेलू चीनी बाजार में हालिया दबाव कम होने के संकेतों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी (Raw Sugar) की कीमतों में गिरावट आई है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक भारत द्वारा पहले अनुमान की तुलना में कम मात्रा में चीनी आयात किए जाने की संभावना ने वैश्विक बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

मंगलवार को न्यूयॉर्क में सबसे सक्रिय Raw Sugar Futures कॉन्ट्रैक्ट की कीमत एक समय करीब 3 फीसदी गिरकर 17.13 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गई। वहीं लंदन के व्हाइट शुगर फ्यूचर्स में भी लगभग 3.9 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में घरेलू आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदारी की उम्मीदों पर असर पड़ा है।

भारत ने चीनी आयात को लेकर उठाए बड़े कदम

भारत में त्योहारों के मौसम से पहले घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई थीं। इसके बाद सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए Raw Sugar के ड्यूटी-फ्री आयात से जुड़े कदम उठाए।

नई व्यवस्था के तहत सरकार ने 10 लाख टन तक ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी। इसके साथ ही रिफाइनरियों को कुछ मात्रा में आयातित चीनी को रिफाइन करने के बाद उसे निर्यात करने के बजाय घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति भी दी गई।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना था।

घरेलू कीमतें घटने से आयात की जरूरत पर बदला अनुमान

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सरकारी कदमों के बाद भारत में घरेलू चीनी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ कम हुआ है।

McDougall Global View के विश्लेषक माइक मैकडॉगल के अनुसार, घरेलू कीमतों में गिरावट यह संकेत दे रही है कि बाजार में पहले जैसी तंगी नहीं रह गई है। ऐसे में भारत को पहले अनुमानित मात्रा में चीनी आयात करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। इसलिए यहां आयात और घरेलू आपूर्ति से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव का असर अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार पर भी पड़ सकता है।

पुराना आयात भी घरेलू बाजार में आ सकता है

पेरिस स्थित ब्रोकरेज फर्म Deepcore के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरनॉड लोरियोज के मुताबिक, भारत में आयात की जरूरत कम होने का एक कारण यह भी है कि Advance Authorization System के तहत पहले से आयात की गई कुछ चीनी को अब घरेलू बाजार की ओर मोड़ा जा सकता है।

इस व्यवस्था के कारण घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए हर बार नई खेप के आयात की आवश्यकता नहीं होगी।

लोरियोज के अनुसार, राहत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिना किसी नई खेप के भी बाजार तक पहुंच सकता है।

भारत में सामान्य तौर पर रिफाइनरों को कुछ परिस्थितियों में कच्ची चीनी को ड्यूटी-फ्री आयात करने की अनुमति होती है, बशर्ते उसे प्रोसेस करने के बाद तैयार चीनी को Tolling Arrangements के तहत निर्यात किया जाए। अब मौजूदा व्यवस्था में कुछ आयातित चीनी को घरेलू बाजार में इस्तेमाल करने की अनुमति मिलने से उपलब्धता बढ़ सकती है।

ब्राजील का मौसम भी वैश्विक बाजार के लिए महत्वपूर्ण

भारत के अलावा दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल ब्राजील से जुड़ी परिस्थितियां भी अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दबाव डाल रही हैं।

माइक मैकडॉगल के मुताबिक, ब्राजील में शुष्क मौसम और गन्ने से अधिक मात्रा में चीनी उत्पादन की ओर झुकाव भी वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर रहा है।

ब्राजील में गन्ने का इस्तेमाल मुख्य रूप से चीनी और एथेनॉल दोनों के उत्पादन में होता है। ऐसे में दोनों उत्पादों की कीमतों के बीच संतुलन उत्पादन कंपनियों के फैसलों को प्रभावित करता है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी चीनी पर असर

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी चीनी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

कच्चे तेल की कीमतें कम होने पर ब्राजील की मिलों के लिए एथेनॉल उत्पादन का आकर्षण घट सकता है। ऐसी स्थिति में मिलें गन्ने का अधिक हिस्सा एथेनॉल के बजाय चीनी उत्पादन में इस्तेमाल कर सकती हैं।

अगर ब्राजील में चीनी का उत्पादन बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता बढ़ने की संभावना रहती है। इससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

भारत के फैसले का वैश्विक चीनी बाजार पर असर

भारत में चीनी की घरेलू कीमतें, आयात नीति और उत्पादन का अंतरराष्ट्रीय बाजार पर काफी प्रभाव पड़ता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल होने के साथ-साथ एक बड़ा उपभोक्ता भी है।

ऐसे में अगर भारत को घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए अनुमान से कम मात्रा में चीनी आयात करनी पड़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में अतिरिक्त मांग का अनुमान कमजोर हो सकता है।

इसी वजह से भारत में घरेलू कीमतों में हालिया गिरावट को वैश्विक शुगर फ्यूचर्स में आई नरमी के प्रमुख कारणों में देखा जा रहा है।

क्या है आगे का संकेत?

फिलहाल चीनी बाजार में निवेशकों की नजर भारत की घरेलू कीमतों, सरकार की आयात नीति, ब्राजील में गन्ने की पेराई और चीनी-एथेनॉल उत्पादन के संतुलन पर बनी रहेगी।

भारत में घरेलू आपूर्ति बेहतर रहती है और ब्राजील में चीनी उत्पादन उम्मीद से अधिक रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं मौसम, उत्पादन या सरकारी नीतियों में कोई बड़ा बदलाव बाजार की दिशा को दोबारा बदल सकता है।

डिस्क्लेमर: कमोडिटी बाजार की कीमतें तेजी से बदल सकती हैं। यह खबर उपलब्ध बाजार रिपोर्टों और विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

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