राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए 10 नगर निगमों में से 8 में बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल कर ली है। चुनाव नतीजों से संकेत मिला है कि राज्य के शहरी इलाकों में बीजेपी के समर्थन आधार में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
इन चुनावों की खास बात यह रही कि पहली बार राजस्थान के सभी शहरी निकायों में एक साथ मतदान कराया गया। राज्य के 309 शहरी निकायों में करीब 1.44 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसे ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बीजेपी ने 8 नगर निगमों में बनाई बढ़त
10 नगर निगमों में बीजेपी 8 जगह बोर्ड बनाने की स्थिति में है। जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं पाली और भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से भी बीजेपी बोर्ड बनाने की स्थिति में नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चुनाव परिणामों के बाद पार्टी कार्यालय में आयोजित जीत के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इसे सरकार और संगठन की बड़ी उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चुनाव परिणामों पर बीजेपी को बधाई दी।
जोधपुर में मुकाबला बेहद रोमांचक
जोधपुर नगर निगम का परिणाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिलीं। अब 10 निर्दलीय पार्षद और एक आरएलपी पार्षद का समर्थन बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
जोधपुर का चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल माना जा रहा है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाना दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
10,245 वार्डों में बीजेपी आगे, कांग्रेस भी मजबूत
राज्य के 309 शहरी निकायों के कुल 10,245 वार्डों में बीजेपी ने 4,179 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3,613 वार्डों में सफलता मिली। निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने 2,273 वार्डों में जीत हासिल की।
वहीं आम आदमी पार्टी ने भी राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। बारां जिले में पार्टी के 42 उम्मीदवारों की जीत को उसके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
वोटों के अंतर से सामने आई करीबी लड़ाई
कुल वोटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। बीजेपी को करीब 37.35 लाख वोट, कांग्रेस को 36.35 लाख वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवारों को 29 लाख से अधिक वोट प्राप्त हुए।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर करीब 99,615 वोट रहा। दोनों प्रमुख दलों के वोट शेयर में अंतर लगभग 0.94 प्रतिशत रहा, जो एक प्रतिशत से भी कम है।
यह आंकड़ा बताता है कि नगर निकाय चुनावों में बीजेपी भले ही सीटों के लिहाज से आगे रही हो, लेकिन वोट शेयर के मामले में कांग्रेस ने उसे कड़ी चुनौती दी है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बड़ी संख्या में वोट हासिल कर दोनों प्रमुख दलों के समीकरण को प्रभावित किया।
ग्रामीण इलाकों में अगली बड़ी परीक्षा
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के बाद अब पंचायत चुनावों पर सभी की नजरें टिक गई हैं। राज्य के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में ग्रामीण मतदाता अगले चरण में मतदान करेंगे।
ग्रामीण चुनावों के नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि राजस्थान में बीजेपी की मौजूदा राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत है और कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्रों में कितना प्रभाव वापस हासिल कर पाती है।
बीजेपी जहां शहरी निकाय चुनाव के प्रदर्शन को अपनी संगठनात्मक मजबूती के तौर पर देख रही है, वहीं कांग्रेस का दावा है कि करीबी वोट अंतर उसके लिए सकारात्मक संकेत है। अब पंचायत चुनाव दोनों दलों के लिए अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा बनने जा रहे हैं।








