ब्रिक्स 2026 सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान और आचार्य बालकृष्ण की मुलाकात
– पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि से ईरान के रिश्तों को और किया गाढ़ा

कुछ रिश्ते समझौतों से नहीं, बल्कि संवेदनाओं से बनते हैं। कुछ रिश्तों की उम्र इतनी लंबी होती है कि उन्हें किसी एक मुलाकात, एक समझौते या किसी एक समारोह में नहीं बांधा जा सकता। भारत और ईरान का रिश्ता शायद कुछ ऐसा ही है।
नई दिल्ली में ब्रिक्स 2026 सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान और पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण की मुलाकात को अगर केवल एक औपचारिक भेंट समझा जाए तो इसकी असली रूह छूट जाएगी। इस मुलाकात में राजनीति से कहीं आगे सभ्यता, संस्कृति, आध्यात्मिकता, चिकित्सा और मानवीय संवेदना के कई गहरे सूत्र आपस में जुड़ते दिखाई दिए। इसी मुलाकात में एक ऐसा प्रसंग भी सामने आया जो पूरी बातचीत का सबसे मानवीय और मार्मिक पक्ष था।
आचार्य बालकृष्ण के शब्दों में गूंजा स्वामी रामदेव का संदेश: ‘जिन्हें कोई झुका नहीं सकता’
जब ईरान पर बमबारी हो रही थी और बेकसूर लोगों का कत्लेआम मचा था, तब उस दर्द को भारत ने अपने दिल में महसूस किया। आचार्य बालकृष्ण ने इस गंभीर प्रसंग पर स्वामी रामदेव के ओजस्वी और भावुक वचनों को उद्धृत करते हुए भारत और पतंजलि के साथ ईरान के आत्मीय रिश्ते को शब्दों में पिरोया। स्वामी रामदेव के संदेश को साझा करते हुए उन्होंने कहा:
‘यद्यपि मैं ईरान के बारे में बहुत सारा तो नहीं जानता, पर इतना जरूर जानता हूँ कि ये पैगंबर मोहम्मद साहब के असल खानदान के लोग हैं, जिन्हें शिया कहा जा सकता है। इनको कोई झुका नहीं सकता, इनको कोई मिटा नहीं सकता, इनको कोई हरा भी नहीं सकता! ईरान के करोड़ों लोग आदरणीय खामेनेई साहब के विचारों को रोम-रोम से जीते हैं। ऐसे लोगों को अमेरिका तो क्या, कोई दुनिया की ताकत नहीं हरा सकती।‘
ईरान के लोगों के दर्द, वहां हुई हिंसा और उनके अदम्य साहस का जिक्र करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने उनके जज्बे, समर्पण और पुरुषार्थ को करीब से देखने का अपना अनुभव साझा किया। यह महज व्यापार या कूटनीति की बात नहीं थी; यह स्वाभिमान, सभ्यता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का सम्मान था।
जब ईरान की जड़ी-बूटियों पर बनी ‘इनसाइक्लोपीडिया’ सौंपने की हुई बात
इस मुलाकात का एक अन्य सबसे रोमांचक पहलू पतंजलि और ईरान के बीच संभावित साझा विरासत का उभरना रहा। आचार्य बालकृष्ण ने राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान के समक्ष ईरान की समृद्ध वनस्पति संपदा और औषधीय पौधों (Medicinal Plants) का जिक्र किया।
उन्होंने ईरान की जड़ी-बूटियों पर तैयार की गई विस्तृत इनसाइक्लोपीडिया (विश्वकोश) का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रपति को सौंपने की इच्छा जताई। किसी देश की वनस्पतियों को केवल पौधों की सूची मानना एक बात है, लेकिन उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान, उपयोग और सदियों के संचित अनुभवों को दस्तावेजों में संजोना दूसरी बात है और यहीं पतंजलि की यह पहल ऐतिहासिक बन जाती है।
क्या ईरान की जड़ी-बूटियां और भारत का आयुर्वेद एक मंच पर आएंगे?

कल्पना कीजिए कि एक तरफ ईरान की धरती पर पाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियों का ज्ञान हो और दूसरी तरफ भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा!
- आधुनिक शोध: दोनों देशों के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटियों पर परखा जाए।
- दस्तावेजीकरण: वनस्पतियों की पहचान और उनके पारंपरिक उपयोगों को सुरक्षित किया जाए।
- मानव कल्याण: इस पूरी साझीदारी का एकमात्र और मुख्य केंद्र दुनिया का स्वास्थ्य और कल्याण हो।
यह अभी किसी औपचारिक समझौते की घोषणा भले न हो, लेकिन संवाद की जो दिशा यहाँ तय हुई है, वह बताती है कि बड़े और क्रांतिकारी काम हमेशा एक विचार से ही शुरू होते हैं।
सदियों पुराने रिश्ते को मिल रही है आधुनिक भाषा
भारत और ईरान के संबंधों की जड़ें आधुनिक कूटनीति से बहुत पुरानी हैं। भाषा, संस्कृति, साहित्य, दर्शन और आध्यात्मिक विचार-विमर्श ने सदियों तक दोनों समाजों को सींचा है। आज जरूरत इस पुराने रिश्ते को केवल दोहराने की नहीं, बल्कि इसे आधुनिक समय के अनुकूल नया अर्थ देने की है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा एक ऐसा क्षेत्र है जहां आयुर्वेद, योग और ईरान की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां मिलकर दो प्राचीन सभ्यताओं के ज्ञान-संसार के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण कर सकती हैं।
निष्कर्ष: ज्ञान-सहयोग और विश्व बंधुत्व की एक नई शुरुआत
आचार्य बालकृष्ण की राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान से हुई यह मुलाकात ईरान की जड़ी-बूटियों से लेकर भारत के योग-आयुर्वेद और मानवीय संवेदनाओं तक फैली हुई है। यह इस बात का प्रतीक है कि अगर भारत और ईरान की इन दो महान परंपराओं का यह संवाद आगे बढ़ा, तो यह आने वाले समय में एक ऐतिहासिक ज्ञान-सहयोग की नींव बनेगा।
भारत–ईरान की यह मैत्री केवल दो राष्ट्रों के बीच का संबंध न रहे बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए स्वास्थ्य, शांति और कल्याण का मार्ग बने, यही इस मुलाकात की सच्ची भावना है।








