पंजाब की राजनीति से जुड़े सबसे संवेदनशील मामलों में से एक 2015 के बेअदबी (सैक्रिलेज) और पुलिस फायरिंग प्रकरण में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल से एक बार फिर विशेष जांच दल (SIT) ने पूछताछ की है। लगभग 11 वर्षों से चल रहे इस मामले में कई बार जांच एजेंसियां बदलीं, नई एसआईटी गठित हुईं और अलग-अलग सरकारों ने न्याय दिलाने का भरोसा दिया, लेकिन अब तक किसी भी मुख्य आरोपी को अंतिम रूप से सजा नहीं मिल सकी है।
एक दशक से अधिक समय बाद भी मामला अधूरा
साल 2015 में हुई बेअदबी की घटनाओं और उसके बाद प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग ने पूरे पंजाब में गहरा असर छोड़ा था। इस मामले ने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी और लंबे समय तक यह चुनावी मुद्दा बना रहा।
हालांकि, समय-समय पर कई जांचें हुईं, लेकिन अब तक मामला अपने अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है। इससे पीड़ित परिवारों और आम लोगों के बीच न्याय प्रक्रिया को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
तीन सरकारें बदलीं, जांच जारी रही
इस मामले की जांच अकाली दल-भाजपा सरकार, कांग्रेस सरकार और वर्तमान आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार—तीनों के कार्यकाल में जारी रही।
हर सरकार ने सत्ता में आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने का वादा किया। इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी मामले में अंतिम न्यायिक फैसला सामने नहीं आ सका।
कई जांच एजेंसियां, लेकिन नतीजा अब भी बाकी
अब तक पंजाब पुलिस की कई विशेष जांच टीमें (SIT) इस मामले की जांच कर चुकी हैं। इसके अलावा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी मामले की जांच की थी।
बार-बार जांच और पूछताछ के बावजूद अदालत में ऐसा कोई अंतिम फैसला नहीं आया, जिससे पूरे मामले का कानूनी निष्कर्ष निकल सके। यही कारण है कि यह मामला लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
2015 की घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था
मामले की शुरुआत जून 2015 में हुई, जब फरीदकोट जिले के एक गुरुद्वारे से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का एक स्वरूप चोरी होने की घटना सामने आई। इसके बाद सितंबर और अक्टूबर 2015 के दौरान बेअदबी से जुड़े अन्य मामले सामने आए, जिससे पूरे पंजाब में व्यापक आक्रोश फैल गया।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इस घटना के बाद राज्यभर में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई थी।
फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
सुखबीर सिंह बादल से दोबारा पूछताछ के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि जांच में लगातार देरी से लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह कानून के दायरे में और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है।
दूसरी ओर, कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों का मानना है कि इतने लंबे समय बाद भी न्यायिक प्रक्रिया पूरी न होना चिंता का विषय है और मामले को जल्द तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।
इंसाफ की उम्मीद अब भी बरकरार
करीब 11 वर्षों से चल रहे इस मामले में एक बार फिर जांच की गतिविधियां तेज हुई हैं। पंजाब की जनता और पीड़ित परिवारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या इस बार जांच किसी ठोस कानूनी निष्कर्ष तक पहुंचेगी या यह मामला पहले की तरह लंबी प्रक्रिया में ही उलझा रहेगा।








