गीले-सूखे कचरे के बेहतर प्रबंधन से लेकर डिजिटल इंडिया और ग्रीन एनर्जी तक, विद्यार्थियों ने चित्रों के जरिए रखी अपने सपनों के भारत की तस्वीर
बालोद। राज्य शासन द्वारा जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत बालोद जिले के स्कूली विद्यार्थियों में रचनात्मकता और सामाजिक जागरूकता का उत्साह देखने को मिल रहा है। अभियान के तहत शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित ‘मेरे सपनों का भारत’ चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए अपनी कल्पनाओं, विचारों और देश के भविष्य को लेकर अपनी सोच व्यक्त करने का महत्वपूर्ण मंच बन रही है।
प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने केवल रंगों और शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि अपने चित्रों और विचारों के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक तकनीक और ऊर्जा के बेहतर उपयोग से भारत को अधिक सशक्त और विकसित बनाया जा सकता है।
कचरा प्रबंधन को लेकर छात्र तुषार गावरे की अनूठी पहल
प्रतियोगिता में छात्र तुषार गावरे ने अपने चित्र के माध्यम से स्वच्छ और सुंदर भारत की परिकल्पना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनके चित्र में स्वच्छता के साथ-साथ गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा कचरे के उचित प्रबंधन की आवश्यकता को रचनात्मक तरीके से दर्शाया गया।
चित्र के माध्यम से यह संदेश उभरकर सामने आया कि स्वच्छ भारत केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि घर और विद्यालय स्तर से ही कचरे को अलग-अलग करने की आदत विकसित करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। गीले कचरे का उपयोग जैविक खाद बनाने में तथा सूखे कचरे के पुनर्चक्रण में किया जा सकता है। विद्यार्थियों की ऐसी रचनाएं लोगों को रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करती हैं।
तुषार की कल्पना में स्वच्छ वातावरण, व्यवस्थित कचरा प्रबंधन और नागरिकों की जिम्मेदारी को प्रमुख स्थान मिला। उनके चित्र ने यह संदेश दिया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर स्वच्छता को लेकर जिम्मेदारी निभाए तो शहरों और गांवों को अधिक स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जा सकता है।
रागिनी देशमुख ने दिखाई ‘विकसित भारत 2047’ की तस्वीर
इसी क्रम में विद्यालय की कक्षा 12वीं की छात्रा रागिनी देशमुख ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। रागिनी ने ‘डिजिटल इंडिया’, ‘ग्रीन इंडिया’, ‘ग्रीन एनर्जी’ और ‘विकसित भारत 2047’ जैसी महत्वपूर्ण विषय-वस्तुओं को अपनी पेंटिंग में शामिल करते हुए भविष्य के भारत की कल्पना प्रस्तुत की।
रागिनी की पेंटिंग में आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की सोच दिखाई दी। डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ हरित ऊर्जा को अपनाने की आवश्यकता और पर्यावरण के प्रति जागरूक समाज की कल्पना को उन्होंने अपने चित्र में स्थान दिया।
‘विकसित भारत 2047’ की थीम के माध्यम से छात्रा ने ऐसे भारत की कल्पना को सामने रखा, जो आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देता हो।
बच्चों की कल्पना में राष्ट्र निर्माण का संदेश
‘मेरे सपनों का भारत’ प्रतियोगिता विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाओं को रचनात्मक माध्यम से व्यक्त करने का अवसर प्रदान कर रही है। चित्रकला और भाषण जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में केवल कलात्मक और भाषण कौशल का विकास ही नहीं होता, बल्कि उन्हें देश, समाज और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर सोचने का अवसर भी मिलता है।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों द्वारा चुने गए विषय यह दर्शाते हैं कि नई पीढ़ी स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी विकास, हरित ऊर्जा और राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों को लेकर जागरूक है। बच्चों की इन रचनात्मक प्रस्तुतियों में भविष्य के भारत को लेकर उनकी उम्मीदें और कल्पनाएं दिखाई दे रही हैं।
स्वच्छता की शुरुआत घर और विद्यालय से
गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने का संदेश विशेष रूप से दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ है। कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण होने से उसके निपटान और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है। ऐसे विषयों को प्रतियोगिताओं में शामिल करने से विद्यार्थियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश परिवार और समाज तक भी पहुंच सकता है।
‘मेरे सपनों का भारत’ जैसे आयोजनों के जरिए बच्चों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों की भागीदारी, स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और तकनीक का सकारात्मक उपयोग भी देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रचनात्मकता के जरिए मजबूत हो रही जागरूकता
‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी यह बताती है कि जब बच्चों को अपनी कल्पनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिलता है तो वे सामाजिक सरोकारों को भी रचनात्मक तरीके से सामने ला सकते हैं। तुषार गावरे के स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन संबंधी चित्र और रागिनी देशमुख की डिजिटल एवं हरित भारत की कल्पना इसी रचनात्मक सोच के उदाहरण हैं।
इन विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रहकर समाज के लिए जागरूकता का संदेश भी देती हैं। स्वच्छ भारत, हरित भारत और विकसित भारत की दिशा में बच्चों की यह सोच आने वाली पीढ़ी में जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने का माध्यम बन सकती है।








