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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज पर्यावरण सम्मेलन के समापन सत्र को करेंगी संबोधित

विज्ञान भवन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा

नई दिल्ली, 20 सितंबर। राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आज समापन होगा। ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन के समापन सत्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु संबोधित करेंगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से आयोजित सम्मेलन 19 और 20 सितंबर को हो रहा है। NGT की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, राष्ट्रपति आज शाम 4 बजे होने वाले वैलिडिक्टरी सेशन की मुख्य अतिथि हैं।

पर्यावरण और जलवायु चुनौतियों पर हुआ मंथन

सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय न्याय और बेहतर पर्यावरणीय शासन से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित करना है। इसमें न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक जानकारी, नीतिगत अनुभव और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी बेहतर कार्यप्रणालियों पर चर्चा की जा रही है।

NGT के मुताबिक सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से संबंधित चुनौतियों के साथ-साथ नीति निर्माण, उसके क्रियान्वयन और प्रभावी अनुपालन में मौजूद कमियों पर भी चर्चा की जा रही है। इसके अलावा अलग-अलग संस्थानों के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

17 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के अलावा 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि तथा पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञ और अन्य हितधारक भाग ले रहे हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, जिला न्यायपालिका से जुड़े प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी है।

इसके साथ ही विभिन्न राज्यों की राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (SEACs), राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों (SEIAAs), राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों और अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि भी सम्मेलन का हिस्सा हैं।

चार तकनीकी सत्रों में प्रमुख विषयों पर चर्चा

दो दिवसीय सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े विषयों पर चार तकनीकी सत्र रखे गए हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन और उससे निपटने की क्षमता, पर्यावरणीय कानून एवं शासन, सतत ऊर्जा तथा जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। NGT की आधिकारिक जानकारी में Climate Change and Resilience, Circular Economy, Biodiversity and Ecosystem Services तथा Sustainable Energy Solutions को सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल किया गया है।

नीति से लेकर अमल तक की चुनौतियों पर जोर

सम्मेलन में इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी नीतियों को प्रभावी तरीके से जमीन पर कैसे लागू किया जाए। पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन, संस्थागत क्षमता, वैज्ञानिक जानकारी के उपयोग और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं।

NGT के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों और संस्थानों के अनुभवों से सीख लेकर पर्यावरण और जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए भविष्य की दिशा और सहयोग का रोडमैप तैयार करने में योगदान देना भी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 19 सितंबर को किया था उद्घाटन

इससे पहले 19 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन का उद्घाटन किया था। उद्घाटन सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने NGT मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया।

सम्मेलन के पहले दिन जलवायु न्याय, समानता, समावेशन, पर्यावरणीय कानून और शासन जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन चर्चाओं में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन, सतत शहरों, ऊर्जा संक्रमण, हरित बुनियादी ढांचे तथा पर्यावरणीय वित्त जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

आज राष्ट्रपति का संबोधन

सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समापन सत्र की मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगी। इस सत्र में केंद्रीय बिजली एवं आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित अन्य प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

पर्यावरणीय न्याय और संस्थागत सहयोग पर रहेगा फोकस

दो दिवसीय सम्मेलन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को न्यायिक, वैज्ञानिक और नीतिगत दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया गया है। अलग-अलग देशों और संस्थानों के अनुभवों के आदान-प्रदान से पर्यावरणीय कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, जलवायु चुनौतियों से निपटने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई है।

राष्ट्रपति के संबोधन के साथ आज सम्मेलन का औपचारिक समापन होगा। इसके बाद सम्मेलन में हुई चर्चाओं और तकनीकी सत्रों से सामने आए विचारों को भविष्य की पर्यावरणीय नीतियों और सहयोग के लिए उपयोगी इनपुट के रूप में देखा जाएगा।

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