संसद परिसर के बाहर राम मंदिर को मिले दान के कथित दुरुपयोग के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा किए गए प्रतीकात्मक प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस प्रदर्शन को “सनातन संस्कृति का अपमान” बताते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने शनिवार को दिल्ली पुलिस से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि संसद के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का अनुचित इस्तेमाल किया गया, जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
क्या था पूरा मामला?
शुक्रवार को संसद के मकर द्वार के पास विपक्षी सांसदों ने अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और माथे पर तिलक लगाकर पुजारी के रूप में नजर आए। उनके हाथ में भगवान श्रीराम का चित्र और दान पेटियां थीं।
इस दौरान विपक्ष के अन्य सांसद श्रद्धालुओं की भूमिका निभाते हुए प्रतीकात्मक रूप से दान पेटी में नोट डालते दिखाई दिए। प्रदर्शन के एक हिस्से में पप्पू यादव ने दान पेटी से नोट निकालकर अपनी जेब में रखे, जिसे विपक्ष ने कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को दर्शाने वाला सांकेतिक प्रदर्शन बताया।
राहुल गांधी भी प्रदर्शन में रहे शामिल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने भी प्रतीकात्मक रूप से दान पेटी में रुपये डाले। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी इस प्रदर्शन में भाग लिया।
विपक्ष का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाना था।
भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने दिल्ली पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि इस प्रकार का प्रदर्शन धार्मिक परंपराओं और सनातन संस्कृति का मजाक उड़ाने जैसा है। उन्होंने मांग की कि प्रदर्शन में शामिल नेताओं के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
भाजपा का आरोप है कि धार्मिक प्रतीकों और आस्था से जुड़े विषयों का राजनीतिक प्रदर्शन में इस प्रकार उपयोग करना अनुचित है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
अभी दर्ज नहीं हुई FIR
समाचार लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में FIR दर्ज किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस शिकायत की जांच के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय ले सकती है।
यदि मामला आगे बढ़ता है, तो संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां भाजपा इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, वहीं विपक्ष अपने प्रदर्शन को भ्रष्टाचार के आरोपों पर सवाल उठाने का लोकतांत्रिक तरीका बता रहा है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गतिविधियां तेज होने की संभावना है।








