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राज ठाकरे का सवाल: “अगर भारत इतना पसंद है तो दुबई में क्यों रहते हैं?” विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन पर साधा निशाना

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख Raj Thackeray ने केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए अभिनेता Vivek Oberoi और R. Madhavan के दुबई में रहने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत के विकास की खुलकर प्रशंसा करता है, तो उसे विदेश में बसने की बजाय भारत में रहना चाहिए।

मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना (MNVS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि देश के कई बड़े उद्योगपति पहले ही भारत छोड़कर दूसरे देशों में जा चुके हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कुछ फिल्मी हस्तियों का भी उल्लेख किया।

विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन का लिया नाम

अपने संबोधन में राज ठाकरे ने कहा कि विवेक ओबेरॉय ने वर्ष 2019 में रिलीज हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक में उनकी भूमिका निभाई थी। उन्होंने दावा किया कि अब अभिनेता दुबई में रहते हैं।

इसके बाद उन्होंने अभिनेता आर. माधवन का भी जिक्र करते हुए कहा कि यदि वे भारत और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की इतनी सराहना करते हैं, तो फिर परिवार के साथ दुबई में रहने का निर्णय क्यों लिया।

राज ठाकरे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी को लगता है कि भारत तेज़ी से विकास कर रहा है और यहां बेहतर माहौल है, तो उसे अपना स्थायी निवास भी भारत में ही रखना चाहिए।

फिल्म उद्योग पर भी की टिप्पणी

अपने भाषण के दौरान राज ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कलाकार सरकारी समर्थन वाली फिल्मों में काम करते हैं और बाद में विदेश लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को अपने बयानों और जीवनशैली में समानता दिखानी चाहिए।

हालांकि, राज ठाकरे ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई अतिरिक्त दस्तावेज़ या प्रमाण सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया। वहीं, इस बयान पर अभिनेता विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच नई बहस

राज ठाकरे का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक विमर्श के दौरान नेताओं और फिल्मी हस्तियों के बयानों को लेकर लगातार बहस देखने को मिल रही है। कई राजनीतिक दल समय-समय पर सार्वजनिक हस्तियों की टिप्पणियों और उनके निजी निर्णयों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी व्यक्ति का विदेश में रहना या निवेश करना व्यक्तिगत और पेशेवर कारणों से भी जुड़ा हो सकता है। वहीं, राजनीतिक मंचों पर ऐसे मुद्दे अक्सर वैचारिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं।

निष्कर्ष

राज ठाकरे के इस बयान ने एक बार फिर राजनीति और फिल्म जगत के संबंधों पर चर्चा तेज़ कर दी है। आने वाले दिनों में यदि संबंधित कलाकार या अन्य राजनीतिक दल इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो यह बहस और आगे बढ़ सकती है।

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