विश्व आयुर्वेद दिवस: पीएम मोदी के विजन पर आगे बढ़ा पतंजलि, हरिद्वार में खुला देश का पहला आयुर्वेद गुरुकुलम् मंच पर मुख्यमंत्री से लेकर कांग्रेस विधायक तक के हाथ में पहुंचा ‘वही’ पतंजलि घी, फिर स्वामी रामदेव ने जो कहा… पीएम मोदी ने उडुपी में श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी से की मुलाकात, विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी का लोगो किया जारी आयुष्मान भारत के 8 साल: गुमला में गरीब परिवारों के लिए इलाज का सहारा बना योजना का कार्ड फरीदाबाद में 4 अक्टूबर को सजेगा हिमाचली संस्कृति का रंग, प्रवासी हिमाचलियों का होगा महासंगम हम मर सकते हैं, धोखा नहीं दे सकते: पतंजलि घी पर उठ रहे सवालों पर स्वामी रामदेव ने दिया जवाब

Guru Purnima 2026: जिनका कोई गुरु नहीं, वे आज किसे करें प्रणाम? जानिए धार्मिक मान्यता

गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु के सम्मान, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, लेकिन कई लोगों के मन में यह प्रश्न भी उठता है कि यदि उनका कोई दीक्षा गुरु या आध्यात्मिक गुरु नहीं है, तो वे किसकी पूजा करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु का अर्थ केवल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं है, बल्कि वह शक्ति है जो जीवन में सही मार्ग दिखाती है। ऐसे में जिन लोगों का कोई प्रत्यक्ष गुरु नहीं है, उनके लिए भी शास्त्रों में कई विकल्प बताए गए हैं।

भगवान श्रीकृष्ण को मान सकते हैं अपना गुरु

सनातन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण को ‘जगतगुरु’ कहा गया है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से मानव जीवन, कर्म, धर्म और मोक्ष का मार्ग बताया। गुरु पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर सकते हैं, गीता का पाठ कर सकते हैं और उनसे जीवन में सही दिशा देने की प्रार्थना कर सकते हैं।

भगवान शिव हैं आदिगुरु

धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव को आदिगुरु की उपाधि दी गई है। योग, ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान की शुरुआत भगवान शिव से मानी जाती है। इस अवसर पर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

महर्षि वेदव्यास का भी विशेष महत्व

गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है क्योंकि यह महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। यदि किसी के पास कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं है, तो वे वेदव्यास को ज्ञान का प्रतीक मानकर उनका स्मरण कर सकते हैं।

पवित्र ग्रंथों का करें सम्मान

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण, महाभारत या अन्य पवित्र ग्रंथ भी ज्ञान के स्रोत हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन इन ग्रंथों का पूजन, अध्ययन और मनन करना भी गुरु की आराधना के समान माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा का संदेश

गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान, संस्कार और सही मार्गदर्शन देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है। चाहे वह शिक्षक हों, माता-पिता, आध्यात्मिक मार्गदर्शक या कोई ऐसा व्यक्ति जिसने जीवन को नई दिशा दी हो, इस दिन उनके प्रति आभार व्यक्त करना भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

🔮 आज का राशिफल