नालायकों को नायक न बनाएं, फिल्मी गीत और संवाद बंद करें: स्वामी रामदेव

फिल्मी सितारों को नहीं, माता-पिता और महापुरुषों को बनाएं रोल मॉडल: स्वामी रामदेव
– ‘विकारों के गुलाम लोग ही गुरु-शिष्य परंपरा को गुलामी बताते हैं’
– गुरु पूर्णिमा पर पतंजलि में 111 कुण्डीय महायज्ञ, 1176 विद्यार्थियों का उपनयन-वेदारंभ संस्कार

हरिद्वार: गुरु पूर्णिमा पर पतंजलि योगपीठ में आयोजित भव्य समारोह में योगगुरु स्वामी रामदेव ने युवाओं से फिल्मी सितारों को आदर्श न मानने की अपील करते हुए कहा कि माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और ऋषि-मुनि ही जीवन के वास्तविक रोल मॉडल हैं। उन्होंने कहा, “आजकल नालायक लोग नायक बन बैठे हैं। ऐसे लोगों को न अपना आदर्श बनाइए, न उनके संवाद बोलिए और न ही उनके लफंगे गीत गुनगुनाइए।” साथ ही गुरु-शिष्य परंपरा पर सवाल उठाने वालों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि जो स्वयं नशा, भोग, विलासिता और प्रलोभनों के गुलाम हैं, वही इस सनातन परंपरा को गुलामी बताते हैं।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पतंजलि योगपीठ में आयोजित कार्यक्रम में हजारों साधक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे। इस दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार गुरु-शिष्य परंपरा है और इसी परंपरा ने देश को ऋषि, मनीषी और महापुरुष दिए हैं।

‘रील नहीं, श्रीराम को बनाओ आदर्श’

युवाओं को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि जिस दिन देश का युवा फिल्मी गीतों के बजाय वेदों के मंत्र गुनगुनाने लगेगा, उसी दिन भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण होगा।

उन्होंने कहा, “फिल्मी सितारों का अनुकरण करने की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं है। हमारे रोल मॉडल रील्स और फिल्मों में नाचने-गाने वाले कलाकार नहीं, बल्कि हमारे माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और हमारे ऋषि-मुनि हैं। हमारे जीवन में श्रीराम का रामत्व, श्रीकृष्ण का कृष्णत्व, शिव का शिवत्व और वेदों का वेदत्व होना चाहिए।”

‘जो स्वयं गुलाम हैं, उन्हें गुरु-परंपरा भी गुलामी लगती है’

गुरु-शिष्य परंपरा की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए स्वामी रामदेव ने कहा, “कुछ मूर्ख और अज्ञानी लोग गुरु-शिष्य परंपरा को गुरु की गुलामी बताते हैं, जबकि वे स्वयं शराब, नशा, भोग, विलासिता, आधुनिक साधनों की गुलामी, मानसिक कुंठाओं और प्रलोभनों के दलदल में फंसे हुए हैं। जो स्वयं विकारों के गुलाम हैं, उन्हें सनातन की पवित्र गुरु-शिष्य परंपरा भी गुलामी ही दिखाई देती है।”

उन्होंने कहा कि गुरु व्यक्ति को पराधीन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ बनाता है।

स्वामी रामदेव ने इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण की निष्ठा, तप और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वे आचार्यों की गौरवशाली परंपरा के सच्चे प्रतिनिधि हैं।


गुरु के चरण स्पर्श कर आचार्य बालकृष्ण ने दिया विनम्रता का संदेश

समारोह के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने मंच पर स्वामी रामदेव के चरण स्पर्श कर गुरु-शिष्य परंपरा की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सकारात्मकता, पुरुषार्थ और आत्मपरिवर्तन का महापर्व है।

उन्होंने कहा, “महापुरुष जिस मार्ग पर चले हैं, वही सत्य का मार्ग है। गुरु के बताए पथ पर चलने वाला साधक कभी भ्रमित नहीं होता।”


1176 विद्यार्थियों का उपनयन-वेदारंभ, 111 कुण्डीय महायज्ञ

गुरु पूर्णिमा पर पतंजलि फेज-दो स्थित योग भवन और आचार्यकुलम् में वैदिक परंपरा के अनुरूप विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

  • आचार्यकुलम् में 1176 विद्यार्थियों का वैदिक रीति से उपनयन एवं वेदारंभ संस्कार कराया गया। उपाध्यक्षा डॉ. ऋतंभरा शास्त्री एवं प्राचार्या स्वाति मुंशी ने सुमनवृष्टि कर भिक्षादान की परंपरा निभाई।
  • योग भवन में 111 कुण्डीय महायज्ञ आयोजित हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं और साधकों ने आहुतियां देकर राष्ट्र, समाज, आरोग्य और विश्व कल्याण की कामना की।

इनकी रही मौजूदगी

समारोह में भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन.पी. सिंह, पतंजलि सिविल सर्विसेज अकादमी के प्रमुख अवध ओझा, पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल, आचार्यकुलम् के उप-प्राचार्य तापस कुमार बेरा, समन्वयिका दीपा देवी, मुख्य छात्रपाल अमित दानी सहित पतंजलि के विभिन्न शिक्षा प्रकल्पों के प्रमुख, संन्यासी, आचार्य, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।

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