15 साल पुराने केस में आचार्य बालकृष्ण दोषमुक्त, स्वामी रामदेव बोले- आखिरकार सत्य और सनातन की हुई विजय
हरिद्वार। आचार्य बालकृष्ण को 15 साल पुराने मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से दोषमुक्त किए जाने के बाद पतंजलि योगपीठ में खुशी का माहौल है। फैसले के बाद स्वामी रामदेव ने इसे लंबे समय से चली आ रही कथित साजिश की हार और सत्य की विजय बताया। उन्होंने दावा किया कि आचार्य बालकृष्ण को 15 वर्षों तक मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के पीछे एक गहरी साजिश थी।
स्वामी रामदेव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि साजिश केवल आचार्य बालकृष्ण को जेल भेजने तक सीमित नहीं थी। उनके मुताबिक, योजना यह थी कि बालकृष्ण को लंबे समय तक जेल में रखा जाए, वहीं उन्हें सड़ाया जाए और जेल में ही उनकी हत्या कर दी जाए। इसके बाद स्वामी रामदेव पर झूठे और फर्जी आरोप लगाकर उन्हें भी जेल में डालने तथा अंततः पतंजलि को खत्म करने की साजिश थी।
रामदेव ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण ने 15 वर्षों तक मानसिक प्रताड़ना, अपमान और अपयश सहा। उन्होंने कहा कि इतने लंबे संघर्ष के बाद अदालत से मिला फैसला उनके लिए बड़ी राहत है। उनके अनुसार, इस फैसले से आचार्य बालकृष्ण, स्वामी रामदेव और पतंजलि के खिलाफ रची गई कथित गहरी साजिश विफल हो गई।
‘सत्यमेव जयते हुआ, लेकिन 15 साल लग गए’
स्वामी रामदेव ने कहा कि सत्य की विजय तो हुई, लेकिन इसके लिए 15 वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि सत्य की जीत में इतना लंबा समय लग जाएगा।
उन्होंने आचार्य बालकृष्ण के मनोबल की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने वर्षों तक मानसिक प्रताड़ना और अपमान सहने के बावजूद वे विचलित नहीं हुए। स्वामी रामदेव ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद और सनातन के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा- अंततः सत्य की विजय हुई
अदालत के फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों से एक झूठे मुकदमे के जरिए उन्हें अपमान, अपयश और मानसिक प्रताड़ना में झोंककर भीतर तक तोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन अंततः सत्य की विजय हुई।
स्वामी रामदेव ने इस फैसले को केवल आचार्य बालकृष्ण की व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि आयुर्वेद, योग, सनातन और पतंजलि के खिलाफ कथित साजिश की पराजय बताया। उन्होंने कहा कि अंततः सत्य की जीत हुई है। उन्होंने न्याय व्यवस्था पर विश्वास जताते हुए समर्थकों और शुभचिंतकों के प्रेम, प्रार्थना और सद्भावनाओं के लिए आभार व्यक्त किया।
क्या था मामला?
यह मामला करीब 15 साल पुराना है। आचार्य बालकृष्ण पर कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े आरोप थे। सीबीआई ने 2011 में मामले की जांच शुरू की थी। अब विशेष सीबीआई अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को साबित न कर पाने के आधार पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।








